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Chandrayaan-1 और Chandrayaan-2 का उद्देश्य क्या था?


Chandrayaan-3:जल्द ही भारत अपन तीसरा चंद्रयान मिशन जिसे चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) कहा जाता है लॉन्च करने जा रहा है। भारत की स्पेस एजन्सी ISRO इस मिशन को अंजाम देने में जुटा हुआ है. पिछले मिशन चंद्रयान-२ की क्रैश लैंडिंग के बाद ISRO इसबार पूरी अभ्यास के साथ मैदान में उतरने वाली है । चंद्रयान-3 के लिए भारतीयोंके अंदर काफी उत्सुकता दिखाई दे रही है. हालांकि चंद्रयान -3 बारे में जाननेसे पहले हमें पिछले २ मिशन के बारेमे जानकारी लेना जरुरी है। तो चलिए जान लेते क्या ते भारत पहले दो चंद्रयान मिशन और उनके उद्देश

क्या था भारत का मिशन चंद्रयान-1 ? (what was Chandrayaan-1)

चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो (ISRO) के द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन था। यह मिशन 22 अक्टूबर, 2008 को चांद पर सफलतापूर्वक पहुंचा। चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) की मुख्य उद्देश्य था चांद सतह के नक्शा तैयार करना और चंद्रमा के निकटवर्ती ग्रहों का अध्ययन करनाऔर उसकी तत्वीय संरचनाएँ, खनिज संसाधन और जल संसाधन की खोज करना।

चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) मिशन के लिए एक उपग्रह यान बनाया गया था, जिसे चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) कहा गया। यह यान 523 किलोग्राम का था और त्रिभुजीय आकार का था। इसकी ऊँचाई 1.5 मीटर थी और इसे विमानक्षेत्र विज्ञान की संकेतों के साथ डिजाइन किया गया था। चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1 )में उपयोग होने वाले मुख्य उपकरणों में उपग्रह चित्रण वाहक (LCAM), वेदिका (CHACE) और मिनियचर (MIP) शामिल थे।

चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) मिशन का मुख्य उद्देश्य था चंद्रमा पर उपस्थिति की जांच करना। इसके लिए, यान ने चंद्रमा की सतह के नक्शा बनाने के लिए कैमरे का उपयोग किया और उपग्रह चित्रण वाहक (LCAM) के माध्यम से उपग्रह के आसपास की क्षेत्रीय विमानक्षेत्रीय जांच की। इसके अलावा, चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) ने चंद्रमा की ग्रहों की अध्ययन करने के लिए अन्य वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया।

चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) मिशन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से, भारतीय वैज्ञानिकों ने विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों को विकसित किया और अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी पहचान स्थापित की। इससे भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता में वृद्धि हुई और आगामी मिशनों के लिए महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ। चंद्रयान-1 (Chandrayaan-1) मिशन की सफलता ने भारत को वैज्ञानिक और अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है।

क्या था भारत का मिशन चंद्रयान-2?

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो (ISRO) द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन रहा है। यह मिशन 2019 के शुरुआती दिनों में चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतर चढ़ाई करने का प्रयास किया था। चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के मुख्य उद्देश्य थे चंद्रमा के नक्शा तैयार करना, चंद्रमा की तत्वीय संरचनाएँ और खनिज संसाधनों की खोज करना, चंद्रमा पर उपयोगी सामग्री और पानी की मौजूदगी की जांच करना और चंद्रमा के प्राकृतिक पर्यावरण की अध्ययन करना।

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन का मुख्य उपकरण दो अंगों में विभाजित था: ओर्बिटर (Orbiter -Atmospheric Module) और लैंडर (विक्रम) (Vikram Lander) । ओर्बिटर का कार्य चंद्रमा की ऑर्बिट में रहकर जांच करना था, जबकि विक्रम लैंडर का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरना था और वहां वैज्ञानिक अध्ययन करना था।

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन की यात्रा 22 जुलाई 2019 को शुरू हुई और 6 सितंबर 2019 को चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर (Vikram Lander) की उतर चढ़ाई की जाने थी। हालांकि, विक्रम लैंडर के लैंडिंग के समय संपर्क टूट गया। यह एक दुःखद घटना थी, लेकिन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन को संघर्ष के बावजूद अपार साहस और विजय की एक मिसाल के रूप में माना जाता है।

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) मिशन ने भारत को विश्व में वैज्ञानिक क्षमता की उच्चतम मान्यता प्रदान की है। इस मिशन ने वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में भारतीयों की महत्वपूर्ण योगदान को प्रकट किया है और देश की अंतरिक्ष गतिशीलता और वैज्ञानिक क्षमता में वृद्धि करने में मदद की है।

चंद्रयान-3 का प्रमुख उद्देश्य

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) भारतीय अंतरिक्ष मिशन का अगला चरण होगा। यह मिशन चंद्रमा की सतह पर प्रवेश करने के लिए निर्माण, उत्पादन और प्रयोग के लिए नई तकनीकों का उपयोग करेगा। चंद्रयान-3 का मुख्य उद्देश्य होगा चंद्रमा की सतह पर उतरना, अनुप्रयोग करना और वैज्ञानिक अध्ययन करना। इस मिशन के अंतर्गत नए प्रयोगालय, वैज्ञानिक उपकरण और नई प्रौद्योगिकियाँ शामिल होंगी।

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो (ISRO) द्वारा संचालित किया जाएगा। यह मिशन भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान दिलाने का लक्ष्य रखेगा और देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देगा। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नई उचाई दिलाने का माध्यम बनाएगी और देश को गर्व का अनुभव कराएगी।




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