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Chandrayaan-3 -क्या है मिशन चंद्रयान-३? क्या है खासियत?


Chandrayaan 3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा आयोजित होने वाली अगली मिशन है। चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 को आगे बढ़ाने वाला मिशन साबित होगा। इसका उद्देश्य चंद्रमा के उच्च पहाड़ियों के पास, उसके दक्षिणी ध्रुव पर एक लैंडर और रोवर को उतारना है। यह मिशन चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग और गतिशीलता की क्षमता को प्रदर्शित करेगा। चंद्रयान-3 को जुलाई में गेओसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन मार्क III (GSLV-Mk III) का उपयोग करके श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा।
चंद्रयान -3 (Chandrayaan-3) को लॉंच करने के लिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में स्थापित जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark III )(GSLV-Mk III), जिसे लॉन्च व्हीकल मार्क III (LVM3) भी कहा जाता है, का उपयोग करके लॉन्च किया जाएगा।

चंद्रयान-3 का उद्देश्य क्या है? (What is the purpose of Chandrayaan-3?)

इसरो ने चंद्रयान ३ मिशन के लिए तीन मुख्य उद्देश्य निर्धारित किए हैं, जिसमें

१ चंद्रमा की सतह पर एक लैंडर की सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग करवाना.

२ चंद्रमा पर रोवर की घूमने की क्षमताओं का अवलोकन और प्रदर्शन करना


३ इन-सीटू वैज्ञानिक अवलोकन मतलब चंद्रमा के सतह पर उपलब्ध रासायनिकऔर नैसर्गिक तत्व, मिटटी, पानी आदि का वैज्ञानिक प्रयोग करना में चंद्रमा की संरचना को अधिक बेहतर ढंग से समझना और अभ्यास करना शामिल है। इंटरप्लेनेटरी मतलब दो ग्रहो के बिच में मिशन के लिए आवश्यक नई तकनीकों का डेवलपमेंट और प्रदर्शन करना
है।

चंद्रयान-3 का कुल वजन कितना है (What is the Total Weight of Chandrayaan-3)

चंद्रयान -3 का कुल वजन 3,900 किलोग्राम है जिसमे एक लैंडर, एक रोवर और एक propulsion module शामिल होगा , जिसमे अकेले प्रणोदन मॉड्यूल( propulsion module), का वजन 2,148 किलोग्राम है, जो लैंडर और रोवर को चंद्रमा की 100 किलोमीटर की कक्षा (lunar orbit) में ले जाएगा। 1,752 किलोग्राम वजन वाला लैंडर मॉड्यूल लैंडर और रोवर को समेटे हुए है। रोवर का वजन 26 किलोग्राम है।

चंद्रयान-3 में कुल कितना खर्चा हुआ ? How much was spent in Chandrayaan-3?

इसरो को चंद्रयान-3(Chandrayaan-3) मिशन को लॉन्च करने के लिए कुल लागत 600 करोड़ रुपये इतनी है । हालांकि यह इसरो द्वारा अपने पहले मिशनों के लिए की गई सबसे अधिक लागत नहीं है, चूंकि चंद्रयान -2 (Chandrayaan-2) मिशन की लागत 960 करोड़ रुपये से कहीं अधिक थी

चंद्रयान-3 मिशन की खासियत और फैक्ट्स (Features and facts of Chandrayaan-3 mission)

चंद्रयान 3 के अंतरिक्ष में लॉन्च होते ही एक रोवर और लैंडर सवार होंगे। और इसमें पिछले चंद्रयान 2(Chandrayaan-2) मिशन जैसा कोई ऑर्बिटर नहीं होगा।

भारत चंद्रमा की अनदेखी सतह को देखना चाहता है, विशेष रूप से चंद्र के ऐसे क्षेत्रों में जहां कुछ अरब वर्षों में सूरज की रोशनी नहीं देखी गई है। वैज्ञानिकों और खगोलविदों यह अनुमान है के चंद्रमा की इस अनजान सतह के इन गहरे क्षेत्रों में बर्फ, पानी और समृद्ध खनिज और तत्व जमा हो सकते हैं।

इस अंतरिक्ष यान का रोवर २०१९ में चंद्रयान 2 (Chandrayaan-3) के क्रैश के बावजूद बचाए गए ऑर्बिटर के माध्यम से पृथ्वी के साथ संपर्क करेगा।

चंद्र कक्षा से 100 किमी की दूरी पर, यह इसका विश्लेषण करने के लिए विशेष कैमरा के माध्यम से सतह की हाय रिसोल्युशन (high resolution) तस्वीरें लेगा।

विशेष बात यह है की यह रोवर 2019 के चंद्रयान -2 (Chandrayaan-2) के विक्रम रोवर के समान ही होगा, लेकिन इसबार इसमें आधुनिक तकनीकद्वारा सुरक्षित लैंडिंग को सुनिश्चित करने में मदद के लिए अधिक सुधार किए गए हैं।

यह प्रणोदन मॉड्यूल 758 वाट बिजली, और लैंडर मॉड्यूल 738 वाट और रोवर 50 वाट बिजली उत्पन्न करेगा।

चंद्रयान-3 के प्रमुख हिस्से (What are the major parts of Chandrayaan-3 ?)

1 प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) -(Propulsion module -PM)
2 स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम)-(Lander module -LM)
3 रोवर- (Rover)

इन तीनो का मुख्या उद्द्देश्य (Interplanetary missions) मतलब भविष्य में 2 ग्रहो के बिच होनेवाली मिशन में लगने वाली आवश्यक नई तकनीकों को विकसित और प्रदर्शित करना है।

1. प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) -(Propulsion module -PM)

Chandrayaan-3 Propulsion Module - Views

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) में प्रवाहन मॉड्यूल (Propulsion Module – PM) एक महत्वपूर्ण घटक है जो चंद्रमा मिशन को उच्चाकांश में पहुंचाने के लिए उपयोग होगा। प्रोपल्शन मॉड्यूल के अंदर चंद्र कक्षा से पृथ्वी के वर्णक्रमीय और ध्रुवीय मीट्रिक मापों का अध्ययन करने के लिए विशेष उपकरण मौजूद है।

  • डिजाइन (Design): प्रणोदन मॉड्यूल की संरचना एक बॉक्स जैसी होती है जिसके हर तरफ एक बड़े सौर पैनल और ऊपर की तरफ एक बड़े सिलेंडर के साथ लगाया जाएगा। इस सिलेंडर को इंटरमॉड्यूल एडेप्टर कोन कहा जाता है, यह लैंडर के लिए मॉउंटिंग का काम करेगा। प्रणोदन मॉड्यूल के तल पर, मुख्य थ्रस्टर नोजल स्थित किया जाता है ।
  • लैंडर मॉड्यूल की पहुंच: यह प्रोपल्शन मॉड्यूल लैंडर और रोवर को चंद्र की कक्षा के 100 किलोमीटर में ले जाएगा। अलग होने के बाद, प्रणोदन मॉड्यूल चंद्रमा के चारों ओर कक्षा में संचार करता रहेगा, और संचार रिले उपग्रह के रूप में कार्य करेगा
  • संचार उपग्रह: प्रवाहन मॉड्यूल चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाने के बाद, चंद्रयान-3 का संचार उपग्रह की भूमिका निभाएगा। यह चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) और अन्य उपग्रहों के बीच संचार स्थापित करेगा।
  • शक्ति उत्पादन: प्रवाहन मॉड्यूल 758 वॉट्स की शक्ति उत्पादन करेगा।
  • प्रयोगों का पाठ्यक्रम: प्रवाहन मॉड्यूल के अंदर वैज्ञानिक प्रयोगों को संचालित करने के लिए उपयोग होने वाले यंत्र होंगे। यह प्रयोगों की संचालन क्षमता को सुनिश्चित करेगा और अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई तकनीकों के विकास और प्रदर्शन को साधारित करेगा।


स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम)-(Lander module -LM)

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) में लैंडर मॉड्यूल एक महत्वपूर्ण घटक है जो चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करने का कार्य करेगा। लैंडर मॉड्यूल को अंतिम 100 किलोमीटर वृत्ताकार आकार की चंद्रमा की ओर ले जाएगा। इसके बाद, प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग हो जाएंगे।

  • डिजाइन (Design): लैंडर मॉड्यूल एक बॉक्स आकार का होता है जिसमें चांद्रयान-3 (Chandrayaan-3) के रोवर को संगठित रूप में स्थापित किया जाता है। इसकी एक बड़ी सौर पैनल और शीर्ष पर एक बड़ा सिलेंडर होता है। चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) में लैंडर ऐसे डिजाइन किया गया है कि वह चंद्रमा पर एक निर्दिष्ट स्थान पर सॉफ्टली लैंड हो सके और रोवर को विशेषज्ञता से चंद्रमा की रसायनिक विश्लेषण करने की सुविधा प्रदान कर सके। यहां लैंडर मॉड्यूल के बारे चंद्रयान २ (Chandrayaan-2) के लैंडिंग की तकनिकी खराबी के बाद चंद्रयान -3 (Chandrayaan-3) में महत्ववपूर्ण बदलाव किए गये है।
  • सुरक्षित लैंडिंग: लैंडर मॉड्यूल को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित तरीके से निर्दिष्ट स्थान पर धीरे से और सही समय लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें चार लैंडिंग लेग्स, चार लैंडिंग थ्रस्टर्स, एक सुरक्षित टचडाउन सुनिश्चित करने के लिए कई सेंसर और खतरों से बचने के लिए कैमरों का एक सूट बनाया गया है ।
  • संपर्क साधन: लैंडर एक एक्स बैंड एंटीना से भी लैस है जो संचार सुनिश्चित करेगा। इसके माध्यम से चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) और अन्य उपग्रहों के बीच संचार स्थापित की जाएगी।
  • प्रयोगों का नियंत्रण: लैंडर मॉड्यूल को वैज्ञानिक प्रयोगों को संचालित करने के लिए आवश्यक यंत्र प्रयुक्त होंगे। इसे बेहतर ढंग से नेविगेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिसे। जिसका उद्देश्य चंद्र सतह का नैसर्गिक और प्राकृतिक रसायनोका विश्लेषण और अभ्यास करना है। प्रोपल्शन मॉड्यूल लैंडर मॉड्यूल को अंतिम 100 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में ले जाएगा। इस कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर मॉड्यूल और प्रोपल्शन मॉड्यूल अपने आप से अलग हो जाएंगे।

2. रोवर- (Rover)

chandrataan-3 rover

चंद्रयान-3 का रोवर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा आयोजित मिशन का महत्वपूर्ण घटक है। रोवर चंद्रमा की सतह की खोज और वैज्ञानिक प्रयोगों को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • डिजाइन: रोवर आयताकार आकार का है और और इसमें छह पहिए और एक नेविगेशन कैमरा है। गतिशीलता के लिए यह 6 पहियों से लैस है। रोवर दो पेलोड से लैस है, जो अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) और लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS) हैं। यह पिछले चंद्रयान-2 मिशन में प्रयुक्त रोवर, जिसे विक्रम रोवर के नाम से जाना जाता है, का एक सुधारित संस्करण है।
  • लैंडिंग और गतिशीलता: रोवर को विशेष रूप से चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें लैंडिंग थ्रस्टर्स और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए संगठित कई सेंसर्स होते हैं।
  • साइंटिफिक प्रयोग: रोवर के पास वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए अपने ही पेलेड्स होते हैं। एपीएक्सएस चंद्र मिट्टी और चारों ओर चट्टानों की मौलिक संरचना को निर्धारित करने में मदद करेगा ।इन प्रयोगों की मदद से चंद्रमा की सतह के तापीय गुणों, भूकंपीय गतिविधि, प्लाज्मा घनत्व, और चंद्रमा के चित्रांकन की जांच की जाती है।
  • नेविगेशन और संचार: रोवर के पास नेविगेशन कैमरा होता है जो गतिशीलता को सुनिश्चित करने में मदद करता है। इसके अलावा, रोवर में संचार के लिए एक एक्स बैंड एंटीना भी होती है।

चंद्रयान-3 के लैंडर में लोड किये जाने वाले उपकरण (Chandrayaan-3 Lander payloads)


चंद्रयान-3 का लैंडर पांच पेलोड से लैस होगा।

Lander payloads

1 चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (Chandra Surface Thermophysical Experiment -ChaSTE)
ChasTE चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव के पास के लिए तापीय गुणों जैसे तापमान और तापीय संचार का मापन करेगा।; ILSA लैंडिंग साइट के आसपास भूकंपीयता का मापन करेगा और और चंद्रमा की पठार और मंडल की संरचना का वर्णन करेगा; एलपी प्लाज्मा घनत्व का अनुमान लगाएगा; और एलआरए, नासा का एक अंतरिक्ष यान, एक निष्क्रिय प्रयोग है जो चंद्रमा की गतिशीलता को समझने में मदद करेगा।

2 इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सिस्मिक एक्टिविटी (Instrument for Lunar Seismic Activity -ILSA)-
ILSA लैंडिंग स्थल के आसपास भूकंपीयता क्षेत्र का अभ्यास करेगा ।

3 लैंगमुइर प्रोब (एलपी)
यह उपकरण प्लाज्मा घनत्व और इसकी विविधताओं का अनुमान लगाएगा

4 नासा (NASA) का लेजर रिट्रोरिफ्लेक्टर ऐरे (LRA)
चंद्र लेजर रेंजिंग अध्ययन के लिए नासा से एक LRA – Laser Retroreflector Array-LRA इस उपकरण को चंद्रयान ३ (Chandrayaan-3) के माध्यम से चाँद पे भेजा जायेगा । LRA, जो NASA के एक अंतरिक्ष यान है, यह समझने में मदद करेगा कि कैसे चंद्रमा की रोशनी पृथ्वी की ओर वापस आती है

5 मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर (RAMBHA) का रेडियो एनाटॉमी।
RAMBHA रेडियो विज्ञान के लिए बनाया गया है और चंद्रमा के आधीव्युष्ट संरचनाओं की गहन वैज्ञानिक जांच करेगा।


चंद्रयान-3 चंद्रयान-3 कब लॉन्च होगा? (chandrayaan-3 launch date)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने 22 मार्च को कहा कि चंद्रयान-3, भारत का तीसरा चंद्र अभियान संभवतः जुलाई महीने के मध्य तक लॉन्च हो जाएगा।

चंद्रयान-3 मिशन की अवधि (Chandrayaan-3 Mission Duration)

लैंडर मॉड्यूल की मिशन अवधि एक चंद्रिका दिवस होगी, जो लगभग 14 पृथ्वी दिनों के बराबर होती है।

mission profile

जीएसएलवी-एमके 3 क्या है? (What is GSLV-Mk III?)

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में स्थापित Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark-III को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया था, यह एक तीन चरण का वाहन है, जिसे संचार उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा में लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसका वजन 640 टन है जो 8,000 किलोग्राम पेलोड को Low Earth Orbit (LEO) और 4000 किलोग्राम पेलोड को GTO (Geo-Synchronous Transfer Orbit) को अपने
अंदर समायोजित कर सकता है।

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) का उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर विज्ञान की गहराई में नई जानकारी प्राप्त करना है और अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाना है। इसके अलावा, इस मिशन से नई प्रौद्योगिकियों का विकास और अंतरग्रहीय मिशनों के लिए अनुभव और कौशल विकसित किए जाएंगे।

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Chandrayaan-3 पिछले मिशन Chandrayaan-2 से अधिक कठिन क्यों है?